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Neil Katya: कौन हैं भारतीय मूल के वकील जिन्होंने ट्रंप टैरिफ को चुनौती दी? जानिए उनका लीगल करियर
US Supreme Court Shocker: भारतीय मूल के वकील नील कत्याल ने ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को कोर्ट में चुनौती दी और 6-3 फैसले से जीत दर्ज की। क्या यह निर्णय राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमा तय करने वाला ऐतिहासिक मोड़ है?

US Supreme Court Indian Origin Lawyer: अमेरिका की राजनीति और कानूनी दुनिया में इन दिनों एक नाम काफी चर्चा में है-नील कत्याल (Neal Katyal)। भारतीय मूल के इस वरिष्ठ वकील ने उस केस में अहम भूमिका निभाई, जिसमें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को अमान्य कर दिया। यह फैसला 6-3 के बहुमत से आया और इसने साफ कर दिया कि टैक्स या टैरिफ लगाने का संवैधानिक अधिकार सिर्फ कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं।
यह मामला इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ से जुड़ा था। कोर्ट ने माना कि IEEPA राष्ट्रपति को आर्थिक लेन-देन नियंत्रित करने की कुछ शक्तियां देता है, लेकिन वह सीधे टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता, क्योंकि टैरिफ को टैक्स माना जाता है।
नील कत्याल कौन हैं? जानिए उनका लीगल करियर
1970 में शिकागो में जन्मे नील कत्याल के माता-पिता भारत से अमेरिका गए थे। उनकी मां बच्चों की डॉक्टर थीं और पिता इंजीनियर। एक इमिग्रेंट परिवार से आने वाले कत्याल ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अमेरिकी कानूनी व्यवस्था में बड़ी पहचान बनाई।
उन्होंने येल लॉ स्कूल (Yale Law School) से पढ़ाई की और बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में कई बड़े केस लड़े। वे पहले एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल भी रह चुके हैं। अब वे मिलबैंक LLP के वॉशिंगटन डीसी ऑफिस में पार्टनर हैं और जटिल अपील मामलों में विशेषज्ञ माने जाते हैं। कत्याल ने सुप्रीम कोर्ट के सामने 50 से ज्यादा केस लड़े हैं। उन्होंने जार्जटाउन यूनिर्विटी लॉ सेंटर (Georgetown University Law Center) में दो दशकों से ज्यादा समय तक पढ़ाया भी है। इतना ही नहीं, वे हार्वर्ड और येल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे हैं।
ट्रंप टैरिफ केस में उनकी दलील क्यों अहम थी?
इस केस में कत्याल ने छोटे अमेरिकी व्यवसायों की ओर से दलील दी। उनका कहना था कि राष्ट्रपति चाहे कितने भी शक्तिशाली हों, वे संविधान से ऊपर नहीं हैं। उन्होंने कोर्ट में जोर देकर कहा कि अमेरिका में टैक्स लगाने की शक्ति सिर्फ कांग्रेस को दी गई है। फैसले के बाद उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी सिस्टम की खूबसूरती है-यहां एक इमिग्रेंट का बेटा भी सुप्रीम कोर्ट में जाकर राष्ट्रपति के फैसले को चुनौती दे सकता है और जीत सकता है।
ट्रंप टैरिफ केस में उनकी दलील क्यों अहम थी?
इस केस में कत्याल ने छोटे अमेरिकी व्यवसायों की ओर से दलील दी। उनका कहना था कि राष्ट्रपति चाहे कितने भी शक्तिशाली हों, वे संविधान से ऊपर नहीं हैं। उन्होंने कोर्ट में जोर देकर कहा कि अमेरिका में टैक्स लगाने की शक्ति सिर्फ कांग्रेस को दी गई है। फैसले के बाद उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी सिस्टम की खूबसूरती है-यहां एक इमिग्रेंट का बेटा भी सुप्रीम कोर्ट में जाकर राष्ट्रपति के फैसले को चुनौती दे सकता है और जीत सकता है।
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद भारतीय सामानों पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ कम हो सकते हैं। पहले जो दरें 50% तक थीं, वे बेसलाइन स्तर पर लौट सकती हैं। हालांकि स्टील और एल्यूमीनियम जैसे कुछ उत्पादों पर अलग कानूनों के तहत टैरिफ बने रह सकते हैं।
क्या यह फैसला सिर्फ ट्रंप के खिलाफ था या सिद्धांत की जीत?
कत्याल ने साफ कहा कि यह मामला किसी एक राष्ट्रपति के बारे में नहीं था, बल्कि शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के बारे में था। यह फैसला बताता है कि अमेरिकी संविधान अभी भी सर्वोच्च है और सत्ता की सीमाएं तय हैं।
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