गुड़ी पड़वा 2026 पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे नवचेतना, संस्कृति और एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने विक्रम संवत के महत्व पर प्रकाश डाला और सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर 1.01 करोड़ के अंतर्राष्ट्रीय सम्मान की घोषणा की।
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गुड़ी पड़वा हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, शुभता और नवचेतना का प्रतीक है। यह पर्व हमें नए संकल्प लेने, जीवन में लक्ष्य तय करने और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। गुड़ी पड़वा हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए एकता, सद्भाव और प्रगति का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि यह दिन सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन को नई दिशा देने का अवसर प्रदान करता है। चैत्र प्रतिपदा का नव संवत्सर प्रकृति के नवजीवन और हरियाली का प्रतीक है। यह समय दो ऋतुओं के संधिकाल का होता है, जब प्रकृति नए रूप में दिखाई देती है।
विक्रम संवत और ऐतिहासिक महत्व
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह तिथि ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य ने विक्रम संवत की शुरुआत की थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री निवास में समग्र मराठी समाज द्वारा आयोजित गुड़ी पड़वा नववर्ष कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
पारंपरिक स्वागत और सांस्कृतिक सम्मान
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का स्वागत ढोल-ताशों के साथ पारंपरिक तरीके से किया गया। उन्हें पेशवाई टोपी पहनाकर सम्मानित किया गया। साथ ही पटका ओढ़ाया गया और छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा भेंट की गई। महाराष्ट्र मंडल, नई दिल्ली के साथ-साथ इंदौर, जबलपुर, भोपाल, सागर, दमोह, छतरपुर, बीना, देवास और उज्जैन से आए प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को गुड़ी भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मराठी साहित्य अकादमी की पत्रिका “अथर्वनाद” का विमोचन किया और लंबे समय से मराठी कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया।
गुड़ी पड़वा: उत्साह, उमंग और नववर्ष का संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति की ध्वजा हर युग में हमारी पहचान रही है। हमने अनेक आक्रमणों का सामना किया, लेकिन हमारी संस्कृति की पहचान कभी समाप्त नहीं हुई। आज पूरी दुनिया भारतीय संस्कृति और परंपराओं के महत्व को स्वीकार कर रही है।
उन्होंने कहा कि गुड़ी पड़वा और नववर्ष सभी के लिए उत्साह, उमंग और आनंद का पर्व है। इसी कारण राज्य सरकार ने इस दिन अवकाश घोषित किया है। गुड़ी पड़वा, जो चैत्र नवरात्रि का पहला दिन भी है, इस अवसर पर मंत्रीगण अपने-अपने जिलों में सूर्य उपासना और उत्सव कार्यक्रमों में भाग लेंगे।
सम्राट विक्रमादित्य और अहिल्याबाई होल्कर का योगदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के शासनकाल में सनातन संस्कृति के मंदिरों का भव्य विकास हुआ। वहीं सम्राट विक्रमादित्य ने गुड़ी पड़वा के महत्व को स्थापित किया। वे न्याय, दान और सुशासन के आदर्श उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भी इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका नेतृत्व भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दे रहा है। निडरता और आत्मविश्वास के साथ देश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूती दिखाई है, जिसका उदाहरण हाल के वैश्विक घटनाक्रमों में भी देखने को मिला है।
सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान की घोषणा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर 1 करोड़ 1 लाख रुपए का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान शुरू किया है। यह देश का एक बड़ा पुरस्कार होगा। यह सम्मान उन व्यक्तियों को दिया जाएगा, जिन्होंने भारतीय संस्कृति, सामाजिक नवाचार, दर्शन, धर्म, परंपरा के प्रचार-प्रसार और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। इस पुरस्कार के लिए गुड़ी पड़वा से नामांकन प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के मूल्यों- न्याय, दान, सुशासन, मानव कल्याण और सर्वधर्म समन्वय को राज्य सरकार लगातार बढ़ावा दे रही है। कार्यक्रम में मराठी साहित्य अकादमी के निदेशक और “अथर्वनाद” पत्रिका के प्रधान संपादक श्री संतोष गोड़बोले ने भी अपने विचार व्यक्त किए।


