मध्य प्रदेश के सिवनी में करंट से मारकर एक बाघ का शव कुएं में फेंका गया। यह इस साल राज्य में 25वें बाघ की मौत है। इस घटना ने 'टाइगर स्टेट' में वन्यजीव सुरक्षा पर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। एक किसान गिरफ्तार हुआ है।

मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में एक खेत के कुएं में एक युवा बाघ का शव मिलने से राज्य में वन्यजीव सुरक्षा को लेकर फिर से चिंता बढ़ गई है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बाघ को पहले करंट लगाकर मारा गया और फिर उसके शव को कुएं में फेंक दिया गया। जिस किसान के खेत में कुआं है, उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। अधिकारी इस मामले से जुड़े अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ कर रहे हैं।

खेत मजदूरों को मिला था शव

बाघ का शव 26 अप्रैल को पास के खेत में काम कर रहे मजदूरों ने देखा था। उन्होंने तुरंत वन विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। अधिकारियों के मुताबिक, बाघ की उम्र करीब डेढ़ से दो साल के बीच थी। उसका शव दक्षिण सिवनी वन मंडल के राजस्व क्षेत्र में मिला। बाद में, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority) के दिशानिर्देशों के अनुसार शव का पोस्टमॉर्टम किया गया।

करंट लगाकर मारने के मिले सबूत

वन अधिकारियों को मौके से साफ सबूत मिले हैं कि बाघ को करंट लगाकर मारा गया था। कुएं से करीब 50 मीटर की दूरी पर जली हुई तारें, खूंटे और बिजली से जुड़ा दूसरा सामान बरामद हुआ है। सब-डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर योगेश कुमार पटेल ने बताया कि ऐसा लगता है कि कुछ अज्ञात लोगों ने बाघ को करंट से मारने के बाद उसके शव को कुएं में फेंक दिया। वन विभाग ने इस मामले में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के लिए जानकारी देने वाले को 10,000 रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।

MP में लगातार हो रही बाघों की मौत

इस साल जनवरी से अब तक मध्य प्रदेश में यह 25वें बाघ की मौत है। साल 2026 की पहली मौत 7 जनवरी को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में दर्ज की गई थी। अधिकारियों ने बताया कि अकेले 2 अप्रैल से अब तक तीन शावकों समेत ग्यारह बाघों की मौत हो चुकी है। पिछले छह दिनों में कान्हा टाइगर रिजर्व के सरही जोन में भी तीन बाघ शावकों की मौत हुई है।

'टाइगर स्टेट' पर बढ़ता दबाव

पूरे भारत में सबसे ज्यादा बाघ मध्य प्रदेश में ही हैं। 2022 की बाघ गणना के अनुसार, राज्य में 785 बाघ हैं। यहां नौ टाइगर रिजर्व भी हैं, जो इसे देश के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्रों में से एक बनाता है। इसलिए, बाघों की बढ़ती मौतें एक बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं।

वन्यजीव कार्यकर्ता ने उठाए सवाल

वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने इस घटना को बेहद चौंकाने वाला बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला अवैध शिकार से जुड़ा हो सकता है और हाल ही में हुई बाघों की मौतों के बाद भी गश्त नहीं बढ़ाने के लिए वन अधिकारियों की आलोचना की। दुबे ने कहा कि कान्हा टाइगर रिजर्व में हाल ही में तीन शावकों की मौत के बाद और कड़े कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों से राज्य भर के जंगलों में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने की अपील की।

बाघों की सुरक्षा पर गहरी चिंता

इस ताजा घटना ने एक बार फिर इस खतरे को उजागर किया है कि संरक्षित वन क्षेत्रों के बाहर बाघ कितने असुरक्षित हैं। खासकर खेतों और गांवों के पास के इलाकों में करंट लगाना एक गंभीर खतरा बना हुआ है। वन अधिकारी अपनी जांच जारी रखे हुए हैं और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही और गिरफ्तारियां होंगी। इस मामले ने भारत के राष्ट्रीय पशु के लिए कड़ी निगरानी और बेहतर सुरक्षा की मांग को फिर से तेज कर दिया है।

(एजेंसियों से मिले इनपुट के साथ)