ईरान-समर्थक हैकर ग्रुप 'हंताला' मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सैनिकों को धमकी भरे संदेश भेज रहा है। हैकर्स ने 2,379 सैनिकों की निजी जानकारी लीक करने का दावा किया है। NCIS के अनुसार, इसका मकसद मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना और दहशत फैलाना है।

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच भले ही फिलहाल सीधी तनातनी रुकी हुई है, लेकिन पर्दे के पीछे साइबर जंग जारी है। ईरान-समर्थक हैकर ग्रुप्स अब मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बना रहे हैं। नेवल क्रिमिनल इन्वेस्टिगेटिव सर्विस (NCIS) ने खुलासा किया है कि यूएस मरीन कॉर्प्स के सदस्यों और उनके परिवारों को धमकी भरे मैसेज भेजे जा रहे हैं। इसके पीछे 'हंताला' नाम के एक हैकर ग्रुप का हाथ बताया जा रहा है।

सैनिकों को मिले एक मैसेज में लिखा था, "तुम्हारी पहचान हमारी मिसाइल यूनिट्स को अच्छी तरह पता है और तुम्हारे हर एक कदम पर हमारी नजर है।" इन धमकियों के साथ-साथ हैकर्स ने करीब 2,379 अमेरिकी सैनिकों की निजी जानकारी लीक करने का दावा भी किया है। हालांकि, NCIS का कहना है कि इन संदेशों का मकसद सिर्फ दहशत फैलाना है और इससे किसी तरह का सीधा शारीरिक खतरा नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई सैनिक इन संदेशों का जवाब मजाकिया अंदाज में दे रहे हैं।

माना जा रहा है कि यही वो ग्रुप है जिसने पिछले मार्च में FBI डायरेक्टर काश पटेल का निजी ईमेल अकाउंट हैक किया था। पिछले महीने ही नेवी सेक्रेटरी ने एक खास निर्देश जारी कर सैनिकों और उनके परिवारों को अपनी ऑनलाइन सुरक्षा मजबूत करने और अनजान संदेशों पर प्रतिक्रिया न देने की सलाह दी थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान अब तकनीकी नुकसान पहुंचाने से ज्यादा मनोवैज्ञानिक युद्ध पर फोकस कर रहा है, ताकि सैनिकों का मनोबल तोड़ा जा सके। खाड़ी क्षेत्र में भले ही संघर्षविराम हो, लेकिन साइबर दुनिया में दोनों देशों के बीच लड़ाई और तेज हो गई है।