Indonesia US Defense Deal: इंडोनेशिया और अमेरिका के बीच संभावित रक्षा समझौते ने नई बहस छेड़ दी है। इस डील के तहत अमेरिकी फाइटर जेट को इंडोनेशिया के एयरस्पेस में विशेष छूट मिल सकती है, जिस पर देश के अंदर ही विरोध शुरू हो गया है।

वैश्विक राजनीति इस समय तेज़ी से बदल रही है। एक ओर जहां ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर बताया जा रहा है, वहीं दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने नई बहस छेड़ दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडोनेशिया अमेरिका के साथ एक बड़े रक्षा समझौते की तैयारी में है। इस डील के तहत अमेरिकी फाइटर जेट को इंडोनेशिया के एयरस्पेस में बिना विशेष अनुमति के उड़ान और लैंडिंग की सुविधा मिल सकती है। फिलहाल इस समझौते का प्रारूप तैयार किया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री और अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बीच बैठक में इस डील को लेकर सहमति बनी है। हालांकि, समझौते के कई अहम बिंदुओं को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता अमेरिका को इंडोनेशिया के सामरिक संसाधनों का इस्तेमाल करने की बड़ी छूट दे सकता है।

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क्यों उठ रहे हैं ‘सरेंडर’ जैसे सवाल?

इस डील को लेकर इंडोनेशिया के अंदर ही विरोध देखने को मिल रहा है।

  • विदेश मंत्रालय का विरोध: अंतरराष्ट्रीय एजेंसी Reuters के मुताबिक, इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय ने इस समझौते पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है।
  • सरकार के अंदर मतभेद: यह पहली बार है जब किसी बड़े रक्षा समझौते को लेकर एक ही देश के दो प्रमुख मंत्रालय रक्षा और विदेश आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।
  • पहले भी उठ चुके हैं सवाल: फरवरी में हुई टैरिफ डील के बाद भी इंडोनेशिया सरकार पर सवाल उठे थे। करीब 65 संगठनों ने इस नीति के खिलाफ याचिका दायर की थी और इसे अमेरिका के सामने झुकने जैसा कदम बताया था।

प्रबोवो सरकार पर क्यों है दबाव?

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो पहले भी अपने फैसलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। अगस्त 2025 में देश के भीतर असंतोष और विरोध के बाद उनकी नीतियों में बदलाव देखा गया। इसके बाद उन्होंने अमेरिका के साथ करीबी बढ़ाई। गाजा मुद्दे पर भी इंडोनेशिया ने अमेरिका के नेतृत्व वाली पहल में हिस्सा लिया और शांति सैनिक भेजने की घोषणा की।

अमेरिका के लिए क्यों अहम है इंडोनेशिया?

इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति उसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।

  • यह देश दक्षिण चीन सागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के बीच स्थित है
  • यहां से आसियान देशों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होता है
  • चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में यह अमेरिका के लिए अहम भूमिका निभा सकता है

विशेषज्ञों का कहना है कि 2020 के बाद से इंडोनेशिया की विदेश नीति में बदलाव आया है और वह धीरे-धीरे अमेरिका के करीब जाता दिख रहा है।

क्या बदल रहा है इंडोनेशिया का रुख?

एक समय में गुट निरपेक्ष आंदोलन का प्रमुख समर्थक रहा इंडोनेशिया अब अपनी पारंपरिक नीति से हटता नजर आ रहा है। जकार्ता पोस्ट में प्रकाशित एक लेख में विश्लेषक एरिक जोन्स ने लिखा कि राष्ट्रपति प्रबोवो अमेरिकी नेतृत्व को खुश करने की कोशिश में हैं और इसके लिए देश की रणनीतिक स्वतंत्रता दांव पर लगाई जा रही है।

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