संसद में ऐतिहासिक दिन: महिला आरक्षण बिल के बाद भारत की राजनीति में क्या-क्या बदलने वाला है?
महिला आरक्षण बिल 2026: महिला आरक्षण संशोधन बिल संसद में पेश, 2029 से लोकसभा-विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण लागू होगा। सीटें 543 से बढ़कर 850 तक हो सकती हैं। 2011 जनगणना आधारित परिसीमन से नई सीटें तय होंगी, विपक्ष सीट वृद्धि का विरोध कर रहा है।

Women Reservation Bill 2026: भारतीय संसद में आज एक ऐसा विशेष सत्र शुरू हो रहा है, जो देश की राजनीतिक संरचना को लंबे समय के लिए बदल सकता है। सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का रास्ता साफ किया जाएगा, जिसे 2029 के आम चुनाव से लागू करने की योजना है।
लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर 850-क्या है बड़ा प्लान?
सबसे बड़ा और चर्चित प्रस्ताव लोकसभा सीटों की संख्या में भारी बढ़ोतरी का है। मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर अधिकतम 850 तक किया जा सकता है। इसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटों का प्रावधान होगा। इस बदलाव के पीछे तर्क है कि बढ़ती आबादी के अनुसार प्रतिनिधित्व को संतुलित किया जाए, लेकिन यह फैसला कई राजनीतिक समीकरणों को भी बदल सकता है।
परिसीमन का नया फॉर्मूला-2011 जनगणना बनेगी आधार
सरकार ने पुराने प्रावधानों से हटते हुए 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराने का संकेत दिया है। इससे पहले 2027 की जनगणना का इंतजार करना जरूरी था, जिसके कारण महिला आरक्षण लागू होने में देरी हो सकती थी। अब इस बदलाव से 2029 में ही नया ढांचा लागू होने की संभावना बन रही है।
273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित-लेकिन कैसे होगा लागू?
प्रस्तावित बिल के अनुसार, कुल सीटों का 33% यानी लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह आरक्षण 15 साल तक लागू रहेगा और सीटों का रोटेशन हर चुनाव में किया जाएगा, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं को अवसर मिल सके। इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल रहेगा।
विपक्ष का विरोध-सदन में हंगामे के आसार
जहां सरकार इसे ऐतिहासिक सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष परिसीमन और सीट बढ़ोतरी के मुद्दे पर कड़ा विरोध जता रहा है। विपक्ष का तर्क है कि इससे कुछ राज्यों को ज्यादा फायदा और कुछ को नुकसान होगा, जिससे संघीय संतुलन बिगड़ सकता है। इस कारण संसद में तीखी बहस और संभावित हंगामे की स्थिति बन सकती है।
तीन दशक पुराना मुद्दा-अब क्यों आया निर्णायक समय?
महिला आरक्षण का मुद्दा लगभग 30 वर्षों से लंबित रहा है। 2010 में यह राज्यसभा से पास हुआ था, लेकिन लोकसभा में अटक गया। 2023 में इसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के रूप में पारित किया गया, लेकिन लागू करने की प्रक्रिया जटिल थी। अब संशोधन के जरिए इसे जल्द लागू करने की कोशिश की जा रही है।
क्या सरकार जुटा पाएगी दो-तिहाई बहुमत?
संविधान संशोधन के लिए सरकार को दोनों सदनों में विशेष बहुमत चाहिए। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, NDA के पास पूर्ण बहुमत तो है, लेकिन दो-तिहाई समर्थन के लिए उसे अन्य दलों का सहयोग भी जरूरी होगा। ऐसे में बैक-चैनल बातचीत और राजनीतिक रणनीति इस बिल के भविष्य को तय करेगी। यह बिल जहां महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, वहीं इसके साथ जुड़े परिसीमन और सीट वृद्धि के मुद्दे इसे और जटिल बना रहे हैं।
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