18 साल बाद बड़ी डील: भारत-EU FTA फाइनल, आज होगा ऐलान, जानिए क्या होगा खास?
Breaking Trade Deal: भारत और EU के बीच 18 साल बाद FTA फाइनल! क्या यह डील भारत के कपड़ा, चमड़ा और ऑटो सेक्टर की किस्मत बदलेगी? 97–99% टैरिफ कटौती, नई सप्लाई चेन और लाखों नौकरियों का दावा-लेकिन क्या 2027 से पहले रास्ते में कोई बड़ा अड़ंगा छिपा है?

India EU Free Trade Agreement: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच जिस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर करीब 18 साल से बातचीत चल रही थी, वह अब आखिरकार अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक, भारत और EU ने इस बड़े व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी कर ली है और आज दोनों पक्षों के नेता इसकी औपचारिक घोषणा करेंगे।
यह इसलिए भी खास है क्योंकि यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामान, सेवाएं, निवेश और सप्लाई चेन जैसे कई अहम पहलू शामिल हैं। इसे भारत और यूरोप के रिश्तों में एक नया अध्याय माना जा रहा है।
भारत–EU FTA आखिर इतना अहम क्यों है?
EU दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक ब्लॉक्स में से एक है, जबकि भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे में यह FTA दोनों के लिए विन-विन डील माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह समझौता भारत को बेहतर बाजार पहुंच, ज्यादा निवेश और रोज़गार के नए मौके देगा।
18 साल तक बातचीत क्यों अटकी रही?
इस समझौते पर बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन कृषि, डेयरी, ऑटोमोबाइल और वाइन जैसे संवेदनशील सेक्टरों पर सहमति नहीं बन पा रही थी। हालांकि 2024 में इस बातचीत को नई रफ्तार मिली। जानकारों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति और वैश्विक व्यापार तनाव ने भारत और EU दोनों को एक-दूसरे के करीब आने के लिए मजबूर किया।
इस डील से भारत को क्या फायदा होगा?
FTA के तहत भारत को उम्मीद है कि उसे कपड़ा, चमड़ा और समुद्री उत्पादों जैसे क्षेत्रों में शून्य-शुल्क (Zero Duty) पहुंच मिलेगी। इसका मतलब यह है कि भारतीय उत्पाद यूरोपीय बाजार में सस्ते और ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे, जिससे निर्यात बढ़ने की संभावना है।
बदले में भारत क्या रियायत देगा?
EU के लिए सबसे अहम मुद्दा ऑटोमोबाइल, वाइन और स्पिरिट जैसे सेक्टर रहे हैं। समझौते के तहत भारत इन क्षेत्रों में सीमित और चरणबद्ध टैरिफ कटौती पर सहमत हुआ है। खासतौर पर कुछ चुनिंदा यूरोपीय गाड़ियों पर कम टैक्स लगाया जा सकता है।
ऑटो सेक्टर पर इतना फोकस क्यों?
EU के व्यापार आयुक्त मारोस सेफकोविक के मुताबिक, भारत और यूरोप का ऑटो सेक्टर एक-दूसरे का पूरक है। भारत छोटी और किफायती कारें बनाता है, जबकि यूरोप हाई-एंड और टेक्नोलॉजी-आधारित वाहन बनाने में माहिर है। इस डील से नई सप्लाई चेन, संयुक्त उत्पादन और निवेश के नए रास्ते खुल सकते हैं।
97–99% टैरिफ कटौती का मतलब क्या है?
- EU चाहता है कि इस FTA के तहत 97 से 99 प्रतिशत वस्तुओं पर टैक्स पूरी तरह या आंशिक रूप से घटाया जाए।
- हालांकि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भारत ने अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाए रखा है।
यह डील कब लागू होगी?
- अधिकारियों के अनुसार, अगले दो हफ्तों में समझौते का साफ टेक्स्ट तैयार होगा।
- इसके बाद 5–6 महीने की कानूनी जांच, फिर यूरोपीय संसद की मंजूरी ली जाएगी।
- अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो यह FTA 2027 की शुरुआत में लागू हो सकता है।
क्या यह समझौता रणनीतिक तौर पर भी अहम है?
बिलकुल। यह FTA सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि सप्लाई चेन को मजबूत करने, जोखिम भरी निर्भरता कम करने, और भारत व EU में रोज़गार बढ़ाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। 18 साल के इंतजार के बाद यह समझौता भारत को वैश्विक व्यापार में नई ताकत दे सकता है-बस अब सबकी नजरें आज होने वाली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं।
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