Rajnath Singh all Party Meeting: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार की सर्वदलीय बैठक में क्या बनी रणनीति? जानिए राजनाथ सिंह, अमित शाह और एस जयशंकर की मौजूदगी में भारत की सुरक्षा, विदेश नीति और नागरिकों को लेकर क्या बड़े फैसले हो सकते हैं।

All Party Meeting: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। बुधवार शाम राजधानी में सर्वदलीय बैठक शुरू हुई, जिसमें देश की सुरक्षा, विदेश नीति और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब अंतरराष्ट्रीय हालात तेजी से बदल रहे हैं और भारत को अपने हितों को लेकर सतर्क रहना जरूरी हो गया है।

बैठक की अगुवाई और कौन-कौन शामिल

इस अहम बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री Rajnath Singh कर रहे हैं। बैठक में सरकार की ओर से गृह मंत्री Amit Shah, विदेश मंत्री S. Jaishankar और वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman मौजूद हैं।

इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री J. P. Nadda और संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju भी बैठक का हिस्सा हैं। ये सभी मंत्री सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से जुड़े अहम सदस्य हैं, जो देश की रणनीतिक दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

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विपक्ष की भागीदारी और कौन रहा अनुपस्थित

सरकार ने इस बैठक में विपक्ष को भी शामिल कर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है। कांग्रेस की ओर से Tariq Anwar और Mukul Wasnik पहुंचे हैं। समाजवादी पार्टी से Dharmendra Yadav और बीजद के Sasmit Patra भी शामिल हुए।

जेडीयू के Lalan Singh और Sanjay Jha भी बैठक में मौजूद हैं। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस ने इस बैठक से दूरी बनाई है और कांग्रेस नेता Rahul Gandhi भी इसमें शामिल नहीं हुए।

बैठक का एजेंडा: सिर्फ चर्चा नहीं, रणनीति भी

इस सर्वदलीय बैठक का मकसद सिर्फ जानकारी साझा करना नहीं, बल्कि एक साझा रणनीति बनाना भी है। विदेश सचिव Vikram Misri बैठक में विस्तृत प्रस्तुति दे रहे हैं, जिसमें पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, भारत के आर्थिक और रणनीतिक हित, और वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।

भारत के सामने क्या हैं बड़ी चुनौतियां

पश्चिम एशिया भारत के लिए सिर्फ एक क्षेत्र नहीं, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और लाखों भारतीयों के रोजगार से जुड़ा अहम इलाका है। ऐसे में किसी भी तरह का तनाव सीधे भारत पर असर डाल सकता है।

  • तेल की कीमतों में उछाल
  • भारतीय नागरिकों की सुरक्षा
  • कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना
  • वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका

इन सभी मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा हो रही है।

आगे क्या संकेत देती है ये बैठक

इस बैठक को लेकर सबसे बड़ा संदेश यह है कि सरकार इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों को साथ लेकर चलना चाहती है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक मजबूत संदेश जाता है कि भारत इस संवेदनशील मुद्दे पर एकजुट है। आने वाले दिनों में भारत की कूटनीतिक पहल, संभावित राहत कदम और विदेश नीति की दिशा इस बैठक के निष्कर्षों पर काफी हद तक निर्भर करेगी।

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