क्या AI Impact Summit 2026 में दिखाया गया ‘ओरियन’ रोबोटिक डॉग सच में देसी इनोवेशन था, या चीनी मॉडल Unitree Go2 को नया नाम देकर पेश किया गया? गलगोटिया विवाद ने प्लेजरिज्म, पारदर्शिता और सरकारी निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
AI Impact Summit 202 Galgotias University Controversy: भारत मंडपम में हुए AI इम्पैक्ट समिट 2026 में उस समय हड़कंप मच गया जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा दिखाए गए रोबोटिक डॉग ‘ओरियन’ पर सवाल उठने लगे। सोशल मीडिया पर लोगों ने दावा किया कि यह कोई नई भारतीय खोज नहीं, बल्कि चीन की कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का पहले से बिक रहा मॉडल Go2 है। मामला इतना बढ़ गया कि सरकार को बीच में आना पड़ा और यूनिवर्सिटी को अपना स्टॉल खाली करने के लिए कहा गया। यह विवाद अब सिर्फ एक रोबोट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि AI इनोवेशन, प्लेजरिज्म, अकादमिक ईमानदारी और सरकारी जवाबदेही जैसे बड़े सवाल खड़े कर रहा है। आखिर सच क्या है? क्या यह सिर्फ गलतफहमी थी या कुछ और?
सरकार की क्या है पहली प्रतिक्रिया?
AI इम्पैक्ट समिट 2026 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी के रोबोटिक डॉग डिस्प्ले पर हुए विवाद पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में, सरकार ने कहा कि गलत जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता है और यूनिवर्सिटी को अपने दावों पर फैसला सुनाने के लिए नहीं, बल्कि एग्ज़िबिट्स के आसपास "कॉन्ट्रोवर्सी" को रोकने के लिए अपना स्टॉल खाली करने के लिए कहा गया था।
क्या ‘ओरियन’ वाकई देसी इनोवेशन था?
यूनिवर्सिटी ने ओरियन नाम का एक रोबोटिक डॉग दिखाया था, यह दावा करते हुए कि इसे उसके सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस ने डेवलप किया है, लेकिन इस डिस्प्ले की ऑनलाइन कड़ी आलोचना तब शुरू हो गई, जब यूज़र्स ने आरोप लगाया कि यह मशीन यूनिट्री रोबोटिक्स द्वारा बनाए गए कमर्शियली अवेलेबल यूनिट्री Go2 जैसी दिखती है। जैसे-जैसे विरोध बढ़ता गया, ऑर्गनाइज़र्स ने भारत मंडपम में यूनिवर्सिटी के स्टॉल की पावर सप्लाई काट दी और उसके रिप्रेजेंटेटिव्स को जाने के लिए कहा।
सरकार ने स्टॉल क्यों हटवाया?
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सेक्रेटरी एस कृष्णन ने साफ कहा कि समिट में “असली और असली काम” दिखना चाहिए। उनका कहना था कि सरकार किसी टेक्निकल जांच में नहीं पड़ रही, लेकिन किसी भी तरह का विवाद या गलत जानकारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह समिट कोई “सर्टिफिकेशन प्लेटफॉर्म” नहीं है। यानी यहां दिखाए गए प्रोडक्ट की पहले से सरकारी जांच नहीं होती।
क्या यह सिर्फ ‘गलत जानकारी’ थी या बड़ी चूक?
आलोचना के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने माफी मांगते हुए कहा कि पवेलियन में मौजूद व्यक्ति को सही जानकारी नहीं थी और उसने बिना अनुमति मीडिया से बात की। यूनिवर्सिटी ने कहा कि “गलत तरीके से पेश करने का कोई इरादा नहीं था।” लेकिन क्या इतनी बड़ी टेक्नोलॉजी समिट में इस तरह की गलती को सिर्फ ‘गलतफहमी’ कहा जा सकता है?
विपक्ष ने क्यों साधा निशाना?
विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे को गंभीर बताया और कमर्शियली उपलब्ध चीनी रोबोट को इन-हाउस इन्वेंशन के तौर पर दिखाने को “शर्मनाक” बताया। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया मार्क्सिस्ट के राज्यसभा MP जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी को “BJP के बड़े नेताओं का सपोर्ट और संरक्षण” मिला हुआ है। डॉ. संबित पात्रा से लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल तक, यूनिवर्सिटी के अलग-अलग प्रोग्राम में शामिल हो चुके हैं। इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि यह इंस्टीट्यूशन अक्सर ‘विकसित भारत’ के नारे पर ज़ोर देता है।” शिवसेना UBT लीडर प्रियंका चतुर्वेदी ने इस घटना को “शर्मनाक” बताया। तृणमूल कांग्रेस के MP साकेत गोखले ने IT मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव की चुप्पी पर सवाल उठाया। फिलहाल, यह मामला शांत जरूर हुआ है, लेकिन इसके पीछे उठे सवाल अभी भी गूंज रहे हैं।


