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इम्फिंज़ी डर्वालुमैब क्या है? कैंसर की वो दवा जिसे भारत में इस्तेमाल की अभी-अभी मिली मंज़ूरी
Breaking Medical Update: कैंसर इलाज में भारत को मिला नया हथियार-इम्फिंज़ी डर्वालुमैब। यह दवा कीमोथेरेपी नहीं, बल्कि इम्यून सिस्टम को एक्टिव कर कैंसर सेल्स का मास्क हटाती है। CDSCO की मंज़ूरी से लंग और एंडोमेट्रियल कैंसर मरीज़ों के लिए नई उम्मीद जगी।

Cancer Treatment Breakthrough: जब कैंसर का नाम आता है, तो ज़्यादातर लोग कीमोथेरेपी से जुड़ी तकलीफों को याद करते हैं। लेकिन अब भारत में कैंसर के इलाज को लेकर एक नई उम्मीद सामने आई है-इम्फिंज़ी (Durvalumab)। हाल ही में भारत की दवा नियामक संस्था CDSCO ने इस इम्यूनोथेरेपी दवा को एक नए इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी दी है। आख़िर डर्वालुमैब है क्या, और यह इतनी खास क्यों मानी जा रही है?
डर्वालुमैब क्या है और यह कीमोथेरेपी से अलग कैसे है?
डर्वालुमैब, जिसे Imfinzi ब्रांड नाम से जाना जाता है, एक इम्यूनोथेरेपी दवा है। पारंपरिक कीमोथेरेपी जहां शरीर की तेज़ी से बढ़ने वाली सभी सेल्स (स्वस्थ और कैंसर दोनों) को नुकसान पहुंचाती है, वहीं डर्वालुमैब का तरीका बिल्कुल अलग है। यह दवा शरीर के इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाकर कैंसर सेल्स पर हमला करवाती है। यानी इलाज बाहर से नहीं, बल्कि शरीर के अंदर से होता है।
PD-L1 क्या है और कैंसर इसे कैसे इस्तेमाल करता है?
कैंसर सेल्स बहुत चालाक होती हैं। वे अपने ऊपर PD-L1 नाम का एक प्रोटीन बना लेती हैं, जो इम्यून सिस्टम को धोखा देता है। यह प्रोटीन T-Cells को संकेत देता है-“मुझ पर हमला मत करो।” डर्वालुमैब इसी PD-L1 को ब्लॉक कर देती है। जैसे ही यह ढाल हटती है, शरीर का इम्यून सिस्टम कैंसर सेल्स को पहचानकर खत्म करना शुरू कर देता है।
भारत में किस कैंसर के लिए मिली है नई मंज़ूरी?
एस्ट्राज़ेनेका फार्मा इंडिया को CDSCO से मंज़ूरी मिली है कि वह डर्वालुमैब को-एंडोमेट्रियल कैंसर (गर्भाशय का कैंसर) खासतौर पर प्राइमरी एडवांस्ड या बार-बार लौटने वाले मामलों में कार्बोप्लाटिन और पैक्लिटैक्सेल कीमोथेरेपी के साथ और बाद में कुछ मरीज़ों के लिए अकेले (Monotherapy)।
यह दवा किन-किन कैंसर में इस्तेमाल होती है?
डर्वालुमैब पहले से कई गंभीर कैंसर में इस्तेमाल हो रही है, जैसे-
- नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (NSCLC)
- स्मॉल सेल लंग कैंसर (SCLC)
- लिवर कैंसर
- बाइलरी ट्रैक्ट कैंसर
- एंडोमेट्रियल कैंसर
- गैस्ट्रिक (पेट) कैंसर
भारत में गैस्ट्रिक कैंसर हर साल हज़ारों लोगों को प्रभावित करता है, और यह दवा ऐसे मरीज़ों के लिए एक नया विकल्प बन सकती है।
क्या इसके साइड इफेक्ट भी हैं?
हां, क्योंकि यह इम्यून सिस्टम को एक्टिव करती है, इसलिए कुछ इम्यून-रिलेटेड साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जैसे-
- थकान
- सांस लेने में दिक्कत
- खांसी
- स्किन रैश
- मांसपेशियों में दर्द
कभी-कभी इम्यून सिस्टम गलती से थायरॉइड, फेफड़े या लिवर पर भी असर डाल सकता है, इसलिए डॉक्टर की निगरानी ज़रूरी है।
भारत में कैंसर इलाज के लिए क्यों है यह दवा अहम?
डर्वालुमैब की उपलब्धता से भारत में कैंसर का इलाज ज़्यादा पर्सनलाइज़्ड, टारगेटेड और असरदार हो सकता है। क्लिनिकल ट्रायल्स में यह देखा गया है कि इससे कई कैंसर में सर्वाइवल रेट बेहतर हुआ है और कैंसर के दोबारा लौटने का खतरा कम हुआ है। इम्फिंज़ी डर्वालुमैब सिर्फ एक नई दवा नहीं, बल्कि भारत में कैंसर इलाज की दिशा बदलने वाली उम्मीद है-जहां इलाज शरीर की ताकत से होगा, न कि सिर्फ दवाओं के ज़ोर से।
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