बेंगलुरु में किराए का संकट गहरा रहा है। मकान मालिक 'अच्छी धूप' जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए ₹80,000 किराया और ₹23 लाख तक का सिक्योरिटी डिपॉजिट मांग रहे हैं। यह बढ़ती मांग आम लोगों के लिए शहर में रहना एक बड़ी चुनौती बना रही है।
सिलिकॉन सिटी बेंगलुरु आजकल अपनी आईटी कंपनियों से ज़्यादा, यहां के अजीबोगरीब किराए की वजह से सुर्खियों में है। यहां घर ढूंढना किसी जंग से कम नहीं है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल एक खबर ने दिखाया है कि बेंगलुरु का रियल एस्टेट मार्केट किस हद तक पहुंच गया है। सिर्फ इसलिए कि घर की खिड़की से अच्छी धूप आती है, मकान मालिक ने 80,000 रुपये किराया मांग लिया, इस घटना ने सबको हैरान कर दिया है।
धूप के लिए भी अब प्रीमियम कीमत
अनु नाम की एक महिला ने एक्स (पहले ट्विटर) पर यह पोस्ट शेयर किया है। जब वह एक फ्लैट किराए पर लेने गईं, तो मकान मालिक ने यह कहकर 80,000 रुपये किराया तय कर दिया कि उस घर में 'अच्छी प्राकृतिक रोशनी और धूप' (Good Sunlight) आती है। हवा और रोशनी, जो पहले किसी भी घर की बुनियादी ज़रूरत मानी जाती थी, अब उसे 'प्रीमियम सुविधा' या लक्ज़री सुविधा बताया जा रहा है। इस पोस्ट के वायरल होते ही लोगों ने गुस्सा जाहिर किया और कहा कि 80,000 रुपये किराया देने से बेहतर है कि इतनी ही रकम की EMI भरकर अपना घर खरीद लिया जाए।
सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर 23 लाख रुपये की मांग!
किराए से जुड़ी ऐसी परेशान करने वाली खबर पहले भी वायरल हो चुकी है। यह घटना बेंगलुरु के बेनिगनहल्ली इलाके में सामने आई थी। कनाडा के एक डिजिटल क्रिएटर द्वारा शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, वहां एक 4BHK घर का मासिक किराया 2.3 लाख रुपये था। लेकिन लोगों को किराए से ज़्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट की रकम ने चौंका दिया। मकान मालिक ने पूरे 10 महीने का किराया, यानी 23 लाख रुपये, एडवांस में देने को कहा था। सोशल मीडिया पर इसे 'लालच की हद' कहा गया था।
आम लोगों की चिंता
इस तरह लगातार बढ़ता किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट की अवास्तविक मांगें बेंगलुरु में रहने वाले आम और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए एक बड़ा बोझ बन गई हैं। आज बेंगलुरु में रहने लायक घरों के लिए भी मुंबई जैसे महंगे शहरों से ज़्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
यह शक होने लगा है कि क्या बेंगलुरु का रेंटल सिस्टम अब सिर्फ पैसा बनाने का धंधा बन गया है। धूप और हवा जैसी प्राकृतिक सुविधाओं के लिए भी अलग से कीमत चुकाने की आज की स्थिति किराएदारों के लिए गले की फांस बन गई है।
कोविड के बाद ऑफिस दोबारा शुरू होने से बेंगलुरु आने वालों की संख्या बढ़ गई है। लेकिन अच्छे घरों की संख्या कम है। साथ ही, सुविधाओं के नाम पर किराया इतना बढ़ रहा है कि यह आम मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। हाल ही में, 'बेंगलुरु रेंटल स्टोरीज़' (Bengaluru Rental Stories) हैशटैग के तहत ऐसी कई घटनाएं वायरल हो रही हैं, जिन्हें हम देख सकते हैं।
