66 वर्षीय रिटायर्ड क्लर्क दिनेश महंत ठाकोरदास अब ब्लिंकिट डिलीवरी पार्टनर हैं। आर्थिक रूप से स्थिर होने के बावजूद, वे सक्रिय रहने के लिए काम करते हैं। 2 साल में 10,220 डिलीवरी कर, वे इस कमाई से देश-विदेश की यात्रा करते हैं।
सोशल मीडिया पर इन दिनों 66 साल के एक रिटायर्ड क्लर्क, दिनेश महंत ठाकोरदास, छाए हुए हैं। वजह है उनका ब्लिंकिट के डिलीवरी पार्टनर के तौर पर काम करना। उनकी इस पोस्ट-रिटायरमेंट लाइफस्टाइल के बारे में जानकर लोग हैरान भी हैं और उनकी तारीफ भी कर रहे हैं। दिनेश जी ने एक लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में 26 साल तक नौकरी की, जिसके बाद उनकी ज़िंदगी काफ़ी स्थिर और सुरक्षित थी। उनके तीन बच्चे हैं, जो अब अपने पैरों पर खड़े हैं और अच्छी तरह सेटल हैं। मतलब, उन्हें पैसों की कोई तंगी नहीं है।
लेकिन रिटायरमेंट के बाद घर बैठने के बजाय, उन्होंने एक नया काम करने का फैसला किया। जब दिनेश जी ने अपने इलाके में एक ब्लिंकिट डिलीवरी पार्टनर को देखा, तो उन्होंने भी यह काम करने की ठानी। जो चीज़ बस एक जिज्ञासा के तौर पर शुरू हुई थी, वो अब उनका रूटीन बन गई है। पिछले दो सालों में वो 10,220 डिलीवरी पूरी कर चुके हैं।
कैसा होता है उनका दिन?
उनका हर दिन का एक फिक्स रूटीन है। सुबह 5 बजे उठकर वो 6 बजे तक कंपनी के लोकल 'डार्क स्टोर' पहुंच जाते हैं। वो आमतौर पर सुबह 11:30 बजे तक काम करते हैं, और उसके बाद तय करते हैं कि दिन का काम खत्म करना है या जारी रखना है। उन्होंने बताया कि वो अपनी कमाई का एक हिस्सा घूमने के लिए अलग रखते हैं। इसी पैसे से वो नए राज्यों, शहरों और यहां तक कि दूसरे देशों की भी यात्रा करते हैं।
इस कमाई का इस्तेमाल भी एक दिलचस्प मकसद के लिए होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, "वो जो भी पैसा कमाते हैं, उसका हर रुपया नए शहरों, राज्यों और देशों में घूमने पर खर्च होता है - और वो जब तक हो सके, ऐसा करना जारी रखना चाहते हैं।"
सोशल मीडिया ने क्या कहा?
इंटरनेट पर उनकी कहानी आते ही लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। एक यूज़र ने लिखा, "अपनी शर्तों पर ज़िंदगी जीने की कोई उम्र नहीं होती। दिनेश महंत ठाकोरदास इसका सबूत हैं।"
एक और यूज़र ने कहा, “खासकर रिटायरमेंट के बाद जब आप एक्टिव रहना बंद कर देते हैं, तो आपके शरीर में दिक्कतें आने लगती हैं। इसलिए ज़िंदगी में बाद में भी खुद को व्यस्त रखना ज़रूरी है।”
एक व्यक्ति ने कहा, “वाकई बहुत बढ़िया और खूबसूरत, उनके जैसे लोग मुझे आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट करते हैं।”
एक और व्यक्ति ने उनकी मेहनत से खुद को जोड़ते हुए लिखा, “मैं भी एक सीनियर सिटिज़न हूं, मैं सुबह जल्दी उठता हूं और अपनी फैक्ट्री में सुबह 8 बजे से काम करता हूं। मुझे अपने काम में मज़ा आता है और काम मुझे मज़बूत बनाता है।”
एक सोशल मीडिया यूज़र ने उनकी तारीफ करते हुए कहा, “यह बहुत अच्छी बात है कि रिटायरमेंट के बाद भी वो एक एक्टिव लाइफस्टाइल चुन रहे हैं। उम्मीद है कि काम करने के हालात अच्छे होंगे।”
