सार

पीएम मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस पर परिवारवाद, तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और कहा कि उनके लिए 'सबका साथ, सबका विकास' संभव नहीं।

नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र (Parliament Budget Session 2025) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर राज्यसभा में अपनी बातें रखी। उन्होंने कहा कि हर किसी ने यहां पर राष्ट्रपति के भाषण को जिस तरह समझा उसी तरह समझाया। यहां सबका साथ, सबका विकास पर बहुत बातें कहीं गईं हैं।

कांग्रेस को लेकर नरेंद्र मोदी ने कहा, "उनसे सबका साथ, सबका विकास की अपेक्षा करना ठीक नहीं। यह उनकी सोच के बाहर है। इतना बड़ा दल परिवार को समर्पित हो गया है। उनके लिए सबका साथ सबका विकास संभव ही नहीं है। कांग्रेस ने राजनीति का एक ऐसा मॉडल तैयार किया था जिसमें झूठ, फरेब, भ्रष्टाचार, परिवारवाद, तुष्टिकरण, सबका घालमेल था। यहां घालमेल हो वहां सबका साथ सबका विकास का तालमेल नहीं हो सकता।"

 

 

कांग्रेस ने तुष्टिकरण, हमने संतुष्टिकरण का मॉडल अपनाया

पीएम ने कहा, "कांग्रेस के लिए परिवार सबसे पहले है। उनकी नीति है फैमिली फर्स्ट। 2014 के बाद देश ने हमें सेवा करने का अवसर दिया। जनता ने हमें लगातार तीसरी बार यहां पहुंचाया है। हमारे लिए राष्ट्र प्रथम है। इसी भावना से हमने देश की सेवा करने का प्रयास किया है। एक लंबे अरसे तक 5-6 दशक बाद 2014 में देश को एक नया मॉडल देखने को मिला। यह मॉडल तुष्टिकरण नहीं संतुष्टिकरण का है। जनता ने हमारे मॉडल को मंजूर किया है। कांग्रेस का तरीका था एक छोटे तबके को दे देना और बाकी को तरसाकर रखना। हमारी कोशिश रही है कि भारत के जो भी संसाधन हैं उनका पूरा उपयोग किया जाए। जो समय है उसके पल-पल का उपयोग देश की प्रगति के लिए हो। पैर उतने फैलाओ जितनी चादर हो, जो योजना शुरू की उसका लाभ सभी को दिया।"

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कांग्रेस ने बाबा साहेब को भारत रत्न के योग्य नहीं समझा

पीएम ने कहा, "कांग्रेस ने बाबा साहेब को चुनाव में हराने के लिए क्या कुछ नहीं किया। कांग्रेस ने कभी बाबा साहेब को भारत रत्न के योग्य नहीं समझा। अब कांग्रेस को मजबूरी में जय भीम बोलना पड़ रहा है। उनका मुंह सूख जाता है। कांग्रेस रंग बदलने में माहिर है। इन्होंने बड़ी तेजी से अपना नकाब बदल लिया है। कांग्रेस ने दूसरे की लकीर छोटी करने का रास्ता चुना। जो लोग लोकसभा चुनाव में उनके साथ थे अब दूर हो गए हैं। अगर कांग्रेस दूसरी की लकीर छोटी करने की जगह अपनी लकीर बड़ी करने की कोशिश करती तो यह दिन नहीं देखना पड़ता।"