सार

जेवर एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा, लेकिन यात्रियों के लिए वहां पहुंचना एक बड़ी चुनौती है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी और महंगी कैब सेवाएं चिंता का विषय हैं। क्या जेवर एयरपोर्ट वाकई में एक सफल परियोजना साबित होगा?

Yaksh Prashna How to reach Noida Airport: यूपी का जेवर एयरपोर्ट, शुरू होने के पहले ही रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। यह एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। अगले कुछ महीनों में एयरपोर्ट से फ्लाइट्स टेकऑफ करने लगेंगी लेकिन सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह कि पैसेंजर्स एयरपोर्ट तक कैसे पहुंचेंगे? ग्रेटर नोएडा के जेवर में बना एयरपोर्ट अगले चार महीने में शुरू हो जाएगा। लेकिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा यहां के लिए कोई नहीं है।

प्रमुख स्थानों से दूरी और ट्रांसपोर्ट की चुनौती

जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की बात करें तो यह दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (आईजीआई) एयरपोर्ट से लगभग 90 किमी की दूरी पर है। तो कनॉट प्लेस से 70 किमी, नोएडा सिटी सेंटर से 60 किमी और ग्रेटर नोएडा के परी चौक से 40 किमी की दूरी पर स्थित है। जेवर की यह दूरी ही फ्लाइट लेने वाले पैसेंजर्स की परेशानी का सबब बन रहा क्योंकि अभी तक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के यात्रियों के लिए यहां पहुंचने के लिए कोई पब्लिक ट्रांसपोर्ट विकल्प नहीं है।

बहुत ही सीमित विकल्प

एयरपोर्ट को शुरू करने के पहले ही अधिकारियों ने तो इस एयरपोर्ट से पहले ही साल में 5-6 मिलियन पैसेंजर्स का लक्ष्य रखा है। लेकिन यह सब अमलीजामा कैसे पहनेगा इस बारे में अधिकारी अभी तक निरुत्तर हैं। सवाल यह कि बिना कनेक्टिविटी के पैसेंजर्स यहां पहुंचेंगे कैसे और पैसेंजर्स के बिना कागज में बनाए गए लक्ष्य को पूरा कैसे किया जा सकेगा। कागजी हकीकत के इतर, जेवर तक पहुंचने के लिए अभी केवल कुछ निजी और उत्तर प्रदेश रोडवेज की बसें ही हैं। इन्हीं के भरोसे जेवर आसपास के इलाकों से कनेक्ट रहता है।

यह परियोजनाएं तो अभी 2030 तक पूरी होंगी तबतक क्या करना होगा इंतजार?

अब बात करते हैं कि जेवर की कनेक्टिविटी के लिए बन रहे रेल कॉरिडोर और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन की। 72 किमी लंबा रैपिड रेल कॉरिडोर और दिल्ली की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन से एयरपोर्ट को जोड़ने वाली मेट्रो का निर्माण अभी लूप में ही है। जानकार बताते हैं कि 2030 से पहले इनके शुरू होने की संभावना नहीं है। हालांकि, दावा किया जा रहा है कि इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए एनआईए ने महिंद्रा मोबिलिटी के साथ पार्टनरशिप कर इलेक्ट्रिक एयरपोर्ट टैक्सी सर्विस शुरू करेगी। लोकल अथॉरिटीज से मिलकर सिटी बस नेटवर्क बनाने की योजना है। लेकिन यक्ष प्रश्न यह कि यह चार महीना में धरातल पर होगा या नहीं?

 

 

कैब की ऊंची कीमतें सारे लोग अफोर्ड नहीं कर सकते!

जेवर तक पहुंचने के लिए सबसे आसान विकल्प कैब सर्विस है। यहां एनसीआर में इंटरसिटी कैब सर्विस है। लेकिन उनकी कीमतें? महंगाई से जूझता मध्यमवर्ग क्या इंटरसिटी कैब सर्विस की ऊंची कीमतें अफोर्ड कर सकेगा। प्राइवेट जॉब कर रहे नोएडा के रहने वाले आशीष शंकर बताते हैं कि नोएडा सेक्टर 52 से एयरपोर्ट तक की कैब सेवा ₹1,365 में उपलब्ध है जबकि परी चौक से यह ₹893 तक होती है। एक फ्लाइट लेने और फिर से कैब करने में काफी अधिक खर्च हो जाएगा। ऐसे में उनका मानना है कि जेवर की बजाय कोई दिल्ली से फ्लाइट क्यों न ले। यहां मेट्रो सर्विस है, अन्य ट्रेवल ऑप्शन्स भी हैं।

बस सर्विस शुरू हो तो कुछ बात बनें...

जेवर एयरपोर्ट से फ्लाइट टेकऑफ शुरू होने से पहले यहां का फौरी समाधान बस सर्विस से ही निकल सकता है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि शुरुआती चरण में 175-200 बसों को शुरू करने का प्रस्ताव है। अगर यह शुरू होता है तो जेवर एयरपोर्ट पैसेंजर्स को आकर्षित कर सकता है। सरकारी दावों के अनुसार, सिटी बसें बॉटैनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन, परी चौक और बुलंदशहर, खुर्जा जैसे एनसीआर के प्रमुख स्थानों को जेवर से जोड़ेंगी। बस सर्विस की बुकिंग मोबाइल ऐप से करायी जाएगी। हालांकि, अभी तक यह तय नहीं है कि बस सर्विस का फेयर और रूट व अन्य चीजें कैसे निर्धारित होंगी।

लेकिन जेवर एयरपोर्ट की सफलता को लेकर एक्सपर्ट्स चिंतित

कनेक्टिविटी के लिए परिवहन विकल्प प्रस्ताव तो जेवर एयरपोर्ट पर पैसेंजर्स को आकर्षित करने के लिए मन को खुश करने वाला भले ही लगता हो लेकिन आने वाले समय में इस पर तय समय में अमल परेशान करने वाला है। जेवर एयरपोर्ट और कनेक्टिविटी समस्याओं को ठीक से समझने वाले एक्सपर्ट्स की मानें तो यह एयरपोर्ट पैसेंजर्स फ्रेंडली बने इसको लेकर संशय है। कनेक्टिविटी का एक भरोसेमंद और मजबूत विकल्प यहां अभी तक नहीं है। बस या कैब सर्विस उतना भरोसेमंद नहीं हो सकते जितना मेट्रो या कुछ और। वह सवाल करते हैं कि कोई आईजीआई एयरपोर्ट की बजाय जेवर क्यों आना पसंद करेगा। जेवर में परेशानी उठाकर आपको पहुंचना है जबकि आईजीआई एयरपोर्ट तक यात्रा अधिक सुविधाजनक है। एक्स्पर्ट्स बताते हैं कि दिल्ली का आईजीआई एयरपोर्ट मेट्रो, बसों और टैक्सियों के साथ सहज कनेक्टिविटी प्रदान करता है। इसी तरह बेंगलुरु का केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शहरभर के यात्रियों को सेवा देने के लिए एक सुविकसित बस नेटवर्क पर निर्भर करता है। लेकिन जेवर में अभी तक इसका अभाव दिख रहा है।

बहरहाल, एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट पर यात्रियों को आकर्षित करने के लिए फाइलों में किए जा रहे दावों से निकलकर धरातल पर स्ट्रैटेजी बनाने की आवश्यकता है। जेवर एयरपोर्ट को लेकर अधिकारियों के अतिउत्साहित दावों पर एक लाइन काफी सटीक है...तुम्हारे फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़ें झूठे हैं, ये दावा किताबी है...।

यह भी पढ़ें:

ज़ुकरबर्ग को संसदीय समिति का समन! चुनाव पर बयान से मचा बवाल?