सार
हिमालय में प्लास्टिक और मानव मल सहित कचरा जमा हो रहा है।
माउंट एवरेस्ट जैसे प्राकृतिक स्थल न केवल मानवीय उपलब्धियों के प्रतीक हैं, बल्कि हमारे ग्रह के पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण घटक भी हैं। इन स्थानों की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना उनके प्राकृतिक सौंदर्य और पारिस्थितिक संतुलन के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन, अगर कचरा फेंकने की मानवीय आदत नहीं बदली, तो बहुत जल्द एवरेस्ट के पास कचरे का एक और पहाड़ खड़ा हो जाएगा, हाल की घटनाएं यही दर्शाती हैं।
एवरेस्ट देखने और पर्वतारोहण के लिए हर दिन आने वाले पर्यटक बिना किसी झिझक के प्लास्टिक कचरा सहित अन्य कचरा फेंक देते हैं। हाल ही में सामने आया एक वीडियो किसी को भी हैरान और निराश करने वाला है। एवरेस्ट के पास और ट्रैकिंग रास्तों पर पर्यटकों द्वारा छोड़े गए कचरे के ढेर को यह वीडियो दिखाता है। पर्यावरणविदों का कहना है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति का यह अद्भुत उपहार नहीं बचेगा।
1953 में एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे द्वारा एवरेस्ट फतह करने के बाद, यह पहाड़ हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ ही कचरा भी जमा होने लगा। आज एवरेस्ट को दुनिया का सबसे बड़ा कचरा घर कहने की नौबत आ गई है। कचरे के ढेर का यह परेशान करने वाला नजारा वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है। कचरे के ढेर में ऑक्सीजन सिलेंडर, प्लास्टिक की बोतलें, खाने के डिब्बे, और यहां तक कि मानव मल भी शामिल है।
प्रदूषण कम करने और इस प्राकृतिक स्थल की पवित्रता बनाए रखने के लिए, नेपाल के अधिकारियों ने बायोडिग्रेडेबल बैग का उपयोग करके पहाड़ से कचरा इकट्ठा करने और हटाने के नए नियम पेश किए हैं। हालांकि, चोटी से पूरी तरह से कचरा हटाना इतना आसान नहीं है। प्रदूषण की समस्या इतनी बढ़ गई है कि आसपास के जल स्रोत दूषित हो गए हैं और बीमारियां फैल रही हैं। एवरेस्ट की सफाई के लिए सरकारें और गैर-सरकारी संगठन अभी भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। 2019 में, नेपाल सरकार ने 10,000 किलोग्राम (22,000 पाउंड) कचरे को साफ करने के लिए एक अभियान शुरू किया था। इसके अलावा, पर्यटकों के लिए जागरूकता कक्षाएं जैसी गतिविधियां अभी भी जारी हैं।