सार

बेंगलुरु, दुनिया के तीसरे सबसे धीमे शहर के रूप में उभरा है, जहाँ 10 किमी की दूरी तय करने में 30 मिनट लगते हैं। टॉमटॉम की रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते निजी वाहनों के कारण ट्रैफिक की समस्या और भी बदतर होती जा रही है।

बेंगलुरु। भारत की आईटी नगरी बेंगलुरु की एक पहचान सबसे खराब ट्रैफिक वाले शहर की भी है। यहां लगने वाले सड़क जाम सुर्खियां बटोरते हैं। 2024 के टॉपटॉम ट्रैफिक इंडेक्स के अनुसार यह दुनिया का तीसरा सबसे धीमा शहर है। पहले दो स्थान पर बैरेंक्विला और कोलकाता हैं। कोलकाता भारत का सबसे धीमा शहर है। वहीं, बेंगलुरु दूसरे नंबर पर है।

डच लोकेशन टेक्नोलॉजी फर्म टॉमटॉम हर साल दुनिया भर के प्रमुख शहरों में ट्रैफिक की स्थिति का मूल्यांकन करती है। इस साल की रिपोर्ट में बेंगलुरु को ट्रैफिक फ्लो के मामले में सबसे खराब शहरों में से एक बताया गया है।

बेंगलुरु में 10km जाने में लगते हैं 30 मिनट

टॉमटॉम की रिपोर्ट से पता चला है कि बेंगलुरु में 10 किलोमीटर की यात्रा करने में लगने वाला औसत समय ​​30 मिनट और 10 सेकंड है। 2023 की तुलना में इसमें 50 सेकंड की वृद्धि हुई है। बैरेंक्विला में लोगों को 10 किलोमीटर जाने में 36 मिनट और 6 सेकंड लगते हैं। कोलकाता में इतनी दूरी तय करने में 34 मिनट और 33 सेकंड लगते हैं। पुणे ने भी इस रैंकिंग में जगह बनाई है। इसने दुनिया के सबसे धीमे शहरों में चौथा स्थान हासिल किया है।

भारत का सबसे भीड़भाड़ वाला शहर है कोलकाता

टॉमटॉम की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कोलकाता सबसे भीड़भाड़ वाला शहर है। बेंगलुरु दूसरे स्थान पर है। 2023 में 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में बेंगलुरु का औसत समय लगभग 28 मिनट और 10 सेकंड था। 2022 में यह आंकड़ा 29 मिनट और 9 सेकंड था। इसने उस समय बेंगलुरु को दुनिया भर में दूसरा सबसे धीमा शहर बना दिया था। 2022 में बेंगलुरु की औसत गति 18 किमी/घंटा थी। यह भारतीय शहरों में सबसे धीमी थी।

लंदन है दुनिया का सबसे भीड़भाड़ वाला शहर

वैश्विक स्तर पर लंदन ने 14 किमी/घंटा की औसत गति के साथ सबसे अधिक भीड़भाड़ वाले शहर के रूप में अपना स्थान बरकरार रखा है। इसके बाद डबलिन (16 किमी/घंटा), मिलान (17 किमी/घंटा), लीमा (17 किमी/घंटा) और टोरंटो (18 किमी/घंटा) का स्थान है।

बता दें कि निजी वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण बेंगलुरु की यातायात समस्याएं बढ़ गई हैं। कुछ साल पहले निजी वाहनों की संख्या के मामले में बेंगलुरु ने नई दिल्ली को पीछे छोड़ दिया था। बेंगलुरु में लगभग 2.5 मिलियन निजी कारें हैं। प्रतिदिन लगभग 2,000 नए वाहनों का रजिस्ट्रेशन हो रहा है। इससे शहर के पहले से ही बोझिल बुनियादी ढांचे पर और भी अधिक दबाव पड़ रहा है।

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