सार

चाणक्य नीति के बारे में बहुत से लोग जानते होंगे। इसमें मनुष्य जीवन से संबंधित कई पहलुओं का उल्लेख चाणक्य ने किया है. इन्हीं में से एक है पति-पत्नी के बीच का रिश्ता. चाणक्य नीति के अनुसार पति-पत्नी कैसे होने चाहिए, आइए जानते हैं... 
 

रिलेशनशिप डेस्क: एक अच्छे समाज के निर्माण में अच्छे परिवारों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. परिवारों में यदि कोई परेशानी नहीं होती और जीवन सुचारू रूप से चलता है, तो समाज में अपराध भी कम होते हैं, ऐसा मनोवैज्ञानिक कहते हैं. कई अपराधों का कारण पारिवारिक कलह होता है, कुछ प्रत्यक्ष उदाहरण इसकी पुष्टि करते हैं. घर में शांति बनी रहे, इसके लिए पति-पत्नी के बीच का रिश्ता मजबूत होना चाहिए. सैकड़ों साल पहले चाणक्य ने इस संबंध में कई बातें बताई थीं. वैवाहिक जीवन सुचारू रूप से चले, इसके लिए चाणक्य नीति में पति-पत्नी के रिश्ते को लेकर कई बातें कही गई हैं. 

शांति और धैर्य है बहुत जरूरी

किन्हीं दो लोगों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है. खासकर पति-पत्नी के बीच झगड़े होना आम बात है. लेकिन, विवाद होने पर शांति और धैर्य से समस्या का समाधान ढूंढना चाहिए. कोई दूसरा हमारी समस्या का समाधान करे, इसके बजाय हमें खुद ही समाधान ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए. खासकर कौन किससे माफी मांगे, इस बात पर अहंकार नहीं करना चाहिए. साथ ही, एक-दूसरे पर विश्वास बनाए रखना चाहिए. किसी भी रिश्ते की नींव विश्वास ही होती है, यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए. 

रिश्ते का करें सम्मान 

वैवाहिक बंधन मजबूत रहे, इसके लिए आपसी सम्मान बहुत जरूरी है. एक-दूसरे का सम्मान न करने पर रिश्ते में समस्याएं आना लाजमी है, ऐसा चाणक्य नीति में बताया गया है. खासकर दूसरों के सामने अपने जीवनसाथी का अपमान करने वाली कोई भी बात नहीं करनी चाहिए. इससे आपके बीच दूरियां बढ़ सकती हैं. 'तुम कम, मैं ज्यादा' वाली सोच से दूर रहना चाहिए. अपनी-अपनी खूबियों और कमियों को स्वीकार करते हुए एक-दूसरे का साथ देना चाहिए. तभी रिश्ते मजबूत बनते हैं. 

आर्थिक मामलों में 

कई घरों में समस्याएं और मनमुटाव का एक बड़ा कारण आर्थिक परेशानियां भी होती हैं. परिवार के आर्थिक मामलों को पति-पत्नी दोनों को मिलकर संभालना चाहिए. कमाई के साथ-साथ बचत के मामले में भी एक-दूसरे का सहयोग करना जरूरी है. ऐसा करने से ही घर और रिश्ता दोनों मजबूत होते हैं. चाणक्य नीति में बताया गया है कि पति-पत्नी के बीच एक-दूसरे को समझना जितना जरूरी है, उतना ही प्यार से रहना भी जरूरी है. अपने जीवनसाथी के प्रति अपने प्यार का इजहार जरूर करें. 

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विश्वास से आएगी मजबूती

पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए प्यार और सम्मान जितना जरूरी है, उतना ही विश्वास भी जरूरी है. अपनी असुरक्षा की भावना अपने जीवनसाथी पर थोपने की कोशिश न करें. यह ठीक नहीं है. ऐसा व्यवहार उन्हें परेशान कर सकता है. साथ ही, विश्वास का गलत फायदा भी नहीं उठाना चाहिए. अगर कोई आप पर भरोसा करता है, तो इसका मतलब है कि वह आप पर पूरा विश्वास करता है. ऐसे विश्वास को कभी तोड़ना नहीं चाहिए. 

पारिवारिक मूल्यों की रक्षा

अगर पति-पत्नी दोनों मूल्यों पर आधारित जीवन जीते हैं, तो कोई परेशानी नहीं आती. धर्म का पालन करते हुए और पारिवारिक मूल्यों की रक्षा करते हुए जीवन जीने से आने वाली पीढ़ियां भी अच्छी बनती हैं. घर के बच्चे अपने माता-पिता को देखकर ही सीखते हैं. इसलिए, माता-पिता के व्यवहार का बच्चों पर गहरा असर पड़ता है, यह बात याद रखें।

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