Lab Grown vs Mined Gold: लैब-ग्रोन गोल्ड तेजी से नया ट्रेंड बन रहा है। यह माइन्ड गोल्ड से 20-40% तक सस्ता हो सकता है और शुद्धता में भी काफी समान होता है। जानें दोनों में कीमत, गुणवत्ता और निवेश के लिहाज से क्या फर्क है और कौन सा विकल्प बेहतर है।

Lab Grown vs Mined Gold: सोने को हमेशा से सुरक्षित निवेश और लक्जरी ज्वेलरी का प्रतीक माना जाता है। लेकिन अब सोने के भाव में तेजी से उछाल के बाद बाजार में लैब-ग्रोन गोल्ड का नया ट्रेंड तेजी से लोगों को खूब पसंद आ रहा है। यह गोल्ड लैब में आधुनिक तकनीक से तैयार किया जाता है, जबकि पारंपरिक माइन्ड गोल्ड जमीन से खनन के जरिए निकाला जाता है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि दोनों में कीमत, शुद्धता और इनवेस्टमेंट के लिहाज से कितना फर्क है, आइए आसान भाषा में समझते हैं।

क्या होता है लैब-ग्रोन गोल्ड

लैब-ग्रोन गोल्ड वैज्ञानिक तकनीक से लैब में तैयार किया जाता है। इसमें नेचुरल सोने जैसे ही केमिकल और फिजिकल प्रॉपरटी होते हैं। यानी दिखने, चमक और स्ट्रक्चर में यह असली सोने जैसा ही होता है, बस इसे जमीन से निकालने के बजाय लैब में बनाया जाता है।

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माइन्ड गोल्ड क्या है?

माइन्ड गोल्ड वह सोना है जो धरती की खदानों से खनन करके निकाला जाता है। इसे निकालने के लिए बड़ी मशीनें, लेबर और समय लगता है। यही पारंपरिक सोना सदियों से ज्वेलरी और इन्वेस्टमेंट के लिए इस्तेमाल होता रहा है।

कीमत में कितना अंतर

लैब-ग्रोन गोल्ड की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम कीमत है। आमतौर पर यह माइन्ड गोल्ड से 20–40% तक सस्ता हो सकता है, क्योंकि इसमें माइनींग, ट्रांसपोर्ट और प्रोसेसिंग का खर्च कम होता है।

प्योरिटी और क्वालिटी

शुद्धता के मामले में लैब-ग्रोन गोल्ड भी उतना ही शुद्ध हो सकता है जितना माइन्ड गोल्ड। दोनों को 22 कैरेट या 24 कैरेट जैसी शुद्धता में तैयार किया जा सकता है। इसलिए ज्वेलरी के रूप में दोनों में ज्यादा फर्क नजर नहीं आता।

इनवेस्टमेंट के लिहाज से कौन बेहतर

इनवेस्टमेंट के मामले में फिलहाल माइन्ड गोल्ड ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है, क्योंकि इसकी मार्केट वैल्यू और रीसेल डिमांड लंबे समय से बनी हुई है। लैब-ग्रोन गोल्ड अभी नया ट्रेंड है, इसलिए इनवेस्टमेंट की बजाय इसे ज्वेलरी ऑप्शन के रूप में ज्यादा पसंद किया जा रहा है।

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