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Union Budget 2023 से भारत का मिडिल क्लास क्या चाहता है? 5 बड़ी उम्मीदें जो पूरा हो तो जिंदगी कुछ आसान हो जाए..
Union Budget 2023: भारत का बजट पहली फरवरी को पेश किया जाएगा। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण अपने सहयोगी मंत्रियों व आर्थिक सलाहकारों के साथ बजट को फाइनल करने में जुटी हुई हैं। हर वर्ग को इस बजट से उम्मीदें हैं। मोदी सरकार के बजट की पोटली में इस बार किस-किस वर्ग को कैसे-कैसे लाभ पहुंचेगा यह तो बजट पेश होने के बाद ही सामने आ सकेगा लेकिन हर कोई इस बार कुछ न कुछ चाहता है। आइए जानते हैं भारत के मिडिल क्लास की बजट-2023 से 5 प्रमुख उम्मीदों के बारे में...
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टैक्स स्लैब में चाहता है छूट मिले...
भारत का मिडिल क्लास टैक्सपेयर इस बार बजट में टैक्स स्लैब में और छूट चाहता है। साथ ही किसी अन्य प्रकार से कोई नया टैक्स नहीं चाहता है कि उस पर थोपा जाए। महंगाई और कोविड काल में नौकरी गंवाने से त्रस्त वर्किंग क्लास को इस बार उम्मीद है कि मोदी सरकार टैक्स स्लैब में छूट दे सकती है। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह संकेत तो दिए हैं कि नए टैक्स नहीं लागू किए जाएंगे लेकिन टैक्स स्लैब को लेकर अभी संशय बरकरार है।
नई बजट में बेरोजगारी दूर करने के लिए प्रावधान की उम्मीद पाले हुए मध्यम वर्ग 1 फरवरी का इंतजार कर रहा है। मिडिल क्लास को यूनियन बजट में रोजगार सृजन के लिए किए जाने वाले पहलों को लेकर उम्मीद है। कोरोना काल में काफी संख्या में लोगों ने रोजगार गंवाए। लाखों लोगों की नौकरियां गई। कई मध्यवर्गीय परिवार अब अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मध्यम वर्ग को जीविकोपार्जन के अवसर देने के लिए सरकार को मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर आदि इंडस्ट्री में रोजगार सृजन के लिए कुछ नया करने की आस है।
कोरोना महामारी के बाद दुनिया में हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में बूम आया है। हालांकि, मध्यम वर्ग को स्वास्थ्य बीमा के लिए सरकार से नियमों में कुछ छूट की उम्मीद है। मध्यम वर्ग लंबे समय से धारा 80डी के तहत स्वास्थ्य बीमा के लिए कटौती को 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये करने की मांग कर रहा है।
मध्यम वर्ग चाहता है कि हेल्थ इंश्योरेंस व लाइफ इंश्योरेंस को जीएसटी मुक्त रखा जाए। वह चाहता है कि बजट-2023 में स्वास्थ्य बीमा और जीवन बीमा पर जीएसटी न लगाए जाने का प्रावधान किया जाए। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य बीमा श्रेणी में आयकर की धारा 80डी में स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के लिए बड़ी कटौती की सीमा होनी चाहिए।
मध्यम वर्ग पर टैक्स का दबाव कम हो इसके लिए ट्यूशन फीस को इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80 सी की कटौती से अलग की जाए। ट्यूशन फीस को किसी अन्य छूट के प्रावधानों में शामिल किया जाए। आयकर अधिनियम की धारा 80सी प्रावधान पहले से ही निवेश/खर्च सहित बहुत सी चीजों से भरा हुआ है और इसकी सीमा 1.5 लाख रुपये है।