प्रयागराज महाकुंभ से वायरल हुई मोनालिसा भोसले ने POCSO एक्ट के तहत एक फिल्म डायरेक्टर और VHP नेता समेत चार लोगों पर केस दर्ज कराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शूटिंग के दौरान उनके साथ गलत व्यवहार हुआ। मामला शादी विवाद और उम्र को लेकर चल रही बहस से भी जुड़ा है, जिससे यह केस और संवेदनशील बन गया है।
मोनालिसा भोसले, जिन्हें “महाकुंभ वायरल गर्ल” के नाम से जाना जाता है, ने एक बड़ा कानूनी कदम उठाते हुए POCSO एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई है। इस मामले में फिल्म डायरेक्टर सनोज मिश्रा और VHP नेता अनिल विलायिल समेत चार लोगों के नाम शामिल हैं। यह FIR 29 अप्रैल 2026 को केरल के Ernakulam Central Police Station में दर्ज हुई। मोनालिसा ने आरोप लगाया है कि फिल्म की शूटिंग के दौरान उनके साथ गलत तरीके से छेड़छाड़ की गई। इस पूरे मामले ने मनोरंजन और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है।
मोनालिसा ने शूटिंग के दौरान गलत व्यवहार का आरोप लगाया
प्रेस कॉन्फ्रेंस मेंमोनालिसा भोसले ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "फिल्म की शूटिंग के दौरान सनोज मिश्रा ने मुझे 10 बार गलत तरीके से छुआ।" उन्होंने यह भी कहा, “जब मैंने अपने परिवार को इसके बारे में बताया, तो उन्होंने मेरा साथ नहीं दिया।” यह मामला फिल्म ‘The Diary of Manipur’ की शूटिंग से जुड़ा बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कोर्ट में अपना बयान भी दर्ज कराया है और आगे की जांच के लिए केस को मध्य प्रदेश पुलिस को ट्रांसफर किया जा सकता है, क्योंकि घटना वहीं हुई बताई जा रही है।
VHP नेता पर मानहानि का आरोप, शादी विवाद भी जुड़ा
मोनालिसा ने अनिल विलायिल पर सोशल मीडिया पर उन्हें बदनाम करने का भी आरोप लगाया है। इस केस के साथ ही उनकी शादी को लेकर चल रहा विवाद भी जुड़ गया है। मोनालिसा के परिवार ने पहले उनके पति फरमान खान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कहा गया था कि शादी के समय मोनालिसा नाबालिग थीं। हालांकि, मोनालिसा का कहना है कि वे 18 साल की हो चुकी हैं। और उन्होंने अपने फैसलों का बचाव किया है। इस विवाद ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
क्या है POCSO एक्ट और क्यों है अहम?
Protection of Children from Sexual Offences Act 2012 एक विशेष कानून है, जो बच्चों को यौन शोषण, उत्पीड़न और दुर्व्यवहार से बचाने के लिए बनाया गया है। इस कानून के तहत 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को बच्चा माना जाता है। इसमें जांच और ट्रायल के दौरान पीड़ित की पहचान को सुरक्षित रखने और चाइल्ड-फ्रेंडली प्रक्रिया अपनाने का प्रावधान है। यह कानून जेंडर-न्यूट्रल है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
