Asha Bhosle Death News: दिग्गज सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके बेटे आनंद भोसले ने इस पुष्टि की। मुंबई में सोमवार (13 अप्रैल 2026) शाम 4 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 8 दशक के करियर में आशा भोसले ने अनगिनत हिट गाने दिए। उनके निधन से संगीत जगत को कभी ना भरने वाली क्षति हुई है।
भारतीय संगीत जगत के लिए बेहद दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है।उनके बेटे आनंद भोसले ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि उनका अंतिम संस्कार मुंबई के शिवाजी पार्क में किया जाएगा। हाल ही में उन्हें तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी आवाज ने करीब आठ दशकों तक करोड़ों दिलों को छुआ। उनके निधन से संगीत प्रेमियों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है।
आशा भोसले के बेटे ने बताया कब होगा अंतिम संस्कार?
आशा भोसले के बेटे आनंद भोसले ने आधिकारिक बयान में कहा, "वो अब हमारे बीच नहीं रहीं। उनका अंतिम संस्कार कल शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में होगा।” आशा भोसले को 11 अप्रैल को मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था। मीडिया में कयास लगाए जा रहे थे कि आशा भोसले को कार्डियक अरेस्ट हुआ है। लेकिन उनकी पोती जनाई भोसले ने इन ख़बरों को गलत बताया था और कहा था कि उनकी दादी को काफी ज्यादा थकावट महसूस होने और चेस्ट इन्फेक्शन की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने अपनी पोस्ट में उनकी प्राइवेसी का सम्मान करने की गुजारिश की थी।
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आशा भोसले का 8 दशक का सुनहरा करियर
आशा भोसले ने महज 10 साल की उम्र में 1943 की मराठी फिल्म ‘माझा बाल’ के लिए पहला गाना गाया था। बाद में उन्होंने अपने 8 दशक लंबे करियर में 11 हजार से ज्यादा गानों को आवाज़ दी, जिनमें ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘कजरा मोहब्बत वाला’, ‘रंगीला रे’ और ‘दिल चीज क्या है’ जैसे कई सुपरहिट गाने शामिल हैं। उन्होंने हर जॉनर में अपनी आवाज का जादू बिखेरा और कई भाषाओं में गाने गाए।
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दो नेशनल तो 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड आशा भोसले के नाम
आशा भोसले को 1981 में फिल्म 'उमराव जान' के गाने 'दिल चीज़ क्या है' और फिर 1986 में 'इजाज़त' के गाने 'मेरा कुछ सामान' के लिए बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का नेशनल अवॉर्ड मिला था। उन्होंने 7 बार फिल्मफेयर अवॉर्ड भी जीता। उनके फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने वाले गानों में 'गरीबों की सुनो' (दस लाख, 1966), 'पर्दे में रहने दो' (शिकार, 1968), 'पिया तू अब तो आजा' (कारवां, 1971), 'दम मारो दम' (हरे राम हरे कृष्ण, 1971), 'होने लगी है रात' (नैना, 1973), 'चैन से हमको कभी' (प्राण जाए पर वचन ना जाए, 1974), 'ये मेरा दिल' (डॉन, 1978) शामिल हैं। साल 2000 में आशा ताई को दादा साहब फाल्के अवॉर्ड मिला और 2008 में वे देश के दूसरे सबसे बड़े सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित की गईं।
